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Monday, 26 December 2011

हसरत

हसरत तो थी के आसमां को छूलूं,
बादल की बाहों में खेलूं,
चाँद को अपनी आगोश में लेलूं,
तारों को अपनी झोली में भर लूँ |


मगर हसरतें तो आखिर हसरतें ही होती हैं,
ख्वाहिशों के बाज़ार में सज-धज के निकला करती हैं,
ढूंढती हैं ये अपने मीत 'हकीक़त' को,
नहीं मिलता तो रो-रो कर बिखर जातीं हैं |


हसरत की कहानी भी बड़ी अजब होती है,
सारी ज़िन्दगी हकीक़त को ढूंढा करती हैं,
जब हो जाती है उनकी मुलाक़ात हकीक़त से,
तो हसरत नहीं ये कहलाती हैं || 

Thursday, 27 December 2007

हसरतें

इन बड़ी बड़ी आँखों में ख्वाब सैंकड़ो ,

चाहतें सैंकड़ो हैं,

इस छोटे से दिल में तमन्नाएं सैंकड़ो,

हसरतें सैंकड़ो
हैं

चाहतों के इस मेले में,

हसरतों के इस खेले में,

कौन जाने किसी हसरत को हकीक़त के पर मिल जाए,

किसी चाहत को सच्चाई की चादर मिल जाये,

इसी आस में,


सपनो को बुना करती
हूँ


हकीक़त से अनजान नहीं मै ,

फिर भी हकीक़त से हिजाब किया करती
हूँ