इन बड़ी बड़ी आँखों में ख्वाब सैंकड़ो ,
चाहतें सैंकड़ो हैं,
इस छोटे से दिल में तमन्नाएं सैंकड़ो,
हसरतें सैंकड़ो हैं
चाहतों के इस मेले में,
हसरतों के इस खेले में,
कौन जाने किसी हसरत को हकीक़त के पर मिल जाए,
किसी चाहत को सच्चाई की चादर मिल जाये,
इसी आस में,
सपनो को बुना करती हूँ
हकीक़त से अनजान नहीं मै ,
फिर भी हकीक़त से हिजाब किया करती हूँ
चाहतें सैंकड़ो हैं,
इस छोटे से दिल में तमन्नाएं सैंकड़ो,
हसरतें सैंकड़ो हैं
चाहतों के इस मेले में,
हसरतों के इस खेले में,
कौन जाने किसी हसरत को हकीक़त के पर मिल जाए,
किसी चाहत को सच्चाई की चादर मिल जाये,
इसी आस में,
सपनो को बुना करती हूँ
हकीक़त से अनजान नहीं मै ,
फिर भी हकीक़त से हिजाब किया करती हूँ